नौकरी नहीं मिल रही? निराश मत हो — ईश्वर की योजना तुमसे बड़ी है | पढ़िए यह लेख और बदलिए अपना दृष्टिकोण
नौकरी नहीं मिल रही और मन बार-बार टूट रहा है? जानिए कैसे हर असफलता ईश्वर की बड़ी योजना का हिस्सा हो सकती है। गीता, भक्ति और आत्मविश्वास के साथ जीवन में नई रोशनी लाने वाला हृदयस्पर्शी लेख।
SPIRITUALITY
2/27/20261 min read
जब बार-बार रिजेक्शन मिले, तो क्या समझें?
रात को सोने से पहले मोबाइल उठाकर मेल चेक करना…
हर दिन “Thank you for applying” वाला संदेश देखना…
घरवालों के सामने सामान्य दिखने की कोशिश करना…
और भीतर से धीरे-धीरे टूटना — यह दर्द वही समझ सकता है जिसने नौकरी की तलाश में महीनों बिताए हों।
अगर आप अभी इस दौर से गुजर रहे हैं, तो पहले एक बात जान लीजिए —
आप अकेले नहीं हैं। और आप असफल भी नहीं हैं।
कई बार जीवन में जो दरवाज़ा बंद होता है, वह हमारी योग्यता के कारण नहीं, बल्कि ईश्वर की बड़ी योजना के कारण बंद होता है।
क्या सच में ईश्वर की कोई योजना होती है?
जब मन निराश होता है, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है —
“अगर भगवान हैं, तो मेरी मदद क्यों नहीं कर रहे?”
पर सनातन धर्म कहता है —
ईश्वर हमारी इच्छा से नहीं, हमारी आवश्यकता से काम करते हैं।
Bhagavad Gita में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं:
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
अर्थ — तुम्हारा अधिकार कर्म करने में है, फल देने में नहीं।
हम नौकरी को सफलता का अंतिम प्रमाण मान लेते हैं।
लेकिन ईश्वर हमें केवल वे फल देते हैं, जो हमारे भविष्य को सही दिशा दें।
कभी-कभी जो नौकरी हम चाहते हैं, वह हमें सीमित कर देती।
जो अवसर हमें नहीं मिलता, वही हमें बड़े उद्देश्य की ओर धकेलता है।
असफलता नहीं, यह आध्यात्मिक परीक्षा है
सनातन संस्कृति में जीवन को युद्ध नहीं, साधना माना गया है।
महान संतों ने भी कठिन समय देखा।
Swami Vivekananda को भी प्रारंभिक जीवन में आर्थिक संकट और अस्वीकार का सामना करना पड़ा।
Tulsidas ने भी गहन कष्टों के बाद ही रामचरितमानस की रचना की।
तो क्या उनका संघर्ष व्यर्थ था?
नहीं। वही संघर्ष उनकी शक्ति बना।
आज आपकी बेरोजगारी भी तपस्या है।
यह समय आपको मजबूत बना रहा है।
मन क्यों टूट जाता है?
जब नौकरी नहीं मिलती, तो तीन चीजें हमें अंदर से खाती हैं:
तुलना
परिवार का दबाव
भविष्य का डर
दोस्त जॉब पर लग गए।
रिश्तेदार पूछने लगते हैं — “अभी तक कुछ नहीं हुआ?”
सोशल मीडिया पर सबकी सफलता दिखती है।
धीरे-धीरे आत्मविश्वास कम होने लगता है।
लेकिन याद रखिए —
दुनिया की टाइमलाइन और ईश्वर की टाइमिंग अलग होती है।
ईश्वर देरी करते हैं, इनकार नहीं
कई बार प्रार्थना तुरंत पूरी नहीं होती।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह सुनी नहीं गई।
Ramcharitmanas में भगवान राम का वनवास 14 वर्षों का था।
क्या वह अन्याय था?
नहीं — वह एक बड़ी लीला की तैयारी थी।
आपका वर्तमान संघर्ष भी किसी बड़े उद्देश्य की तैयारी हो सकता है।
उदासी से बाहर आने के लिए क्या करें?
अब हम केवल धार्मिक बात नहीं करेंगे, बल्कि व्यावहारिक उपाय भी समझेंगे।
1. रोज़ 20 मिनट जप या ध्यान करें
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर
“ॐ नमः शिवाय” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।
मन शांत होगा।
चिंता कम होगी।
विश्वास बढ़ेगा।
2. अपने दिन की शुरुआत शिकायत से नहीं, कृतज्ञता से करें
हर सुबह 5 चीजें लिखें जिनके लिए आप आभारी हैं।
जब आप धन्यवाद देना शुरू करते हैं,
तो ब्रह्मांड आपके लिए नए अवसर खोलता है।
3. खुद को अयोग्य मत समझें
नौकरी नहीं मिलना, आपकी योग्यता का प्रमाण नहीं है।
आज की प्रतिस्पर्धा में कई बार चयन किस्मत, नेटवर्क या समय पर भी निर्भर करता है।
आपका मूल्य किसी ऑफर लेटर से तय नहीं होता।
आप ईश्वर की संतान हैं — और वह आपको व्यर्थ नहीं बनाते।
यह समय आत्म-विकास का है
जब नौकरी नहीं मिलती, तो यह समय तीन चीजों के लिए उपयोग करें:
नई स्किल सीखें
शरीर को मजबूत करें
आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाएँ
रोज़ कम से कम 30 मिनट किसी नई स्किल पर काम करें।
रोज़ व्यायाम करें।
रोज़ आध्यात्मिक पुस्तक पढ़ें।
धीरे-धीरे आप खुद में बदलाव महसूस करेंगे।
घरवालों के ताने कैसे संभालें?
कभी-कभी परिवार भी अनजाने में दबाव बना देता है।
ऐसे में क्रोध नहीं, धैर्य रखें।
वे आपकी चिंता करते हैं।
उनसे खुलकर बात करें।
उन्हें अपनी तैयारी और योजना समझाएँ।
विश्वास रखिए —
धैर्य और विनम्रता से सब ठीक होता है।
याद रखिए — यह अध्याय है, पूरी कहानी नहीं
जब जीवन में अंधेरा होता है, तो लगता है सब खत्म हो गया।
लेकिन यह बस एक अध्याय है।
किताब अभी पूरी नहीं हुई।
कई बार सबसे बड़ी सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है जिसने सबसे अधिक इंतज़ार किया।
दिल से एक बात
अगर आज आपका मन रो रहा है, तो रो लीजिए।
आँसू कमजोरी नहीं, शुद्धि हैं।
लेकिन रोने के बाद उठिए।
हाथ जोड़कर ईश्वर से कहिए:
“हे प्रभु, मैं प्रयास करूँगा। फल आप पर छोड़ता हूँ।”
यही सच्चा विश्वास है।
यही सच्ची भक्ति है।
अंतिम संदेश — आप हारने के लिए पैदा नहीं हुए
आपका जीवन सिर्फ नौकरी पाने के लिए नहीं बना है।
आपमें ईश्वर की शक्ति है।
आज भले ही ऑफर लेटर नहीं है,
लेकिन आपके भीतर उम्मीद है।
और जहाँ उम्मीद है, वहाँ ईश्वर की कृपा निश्चित है।
निष्कर्ष
नौकरी न मिलना अंत नहीं है।
यह जीवन की परीक्षा है।
यह आत्म-बल को जागृत करने का समय है।
यह ईश्वर पर भरोसा मजबूत करने का अवसर है।
याद रखिए:
कर्म करते रहिए
विश्वास बनाए रखिए
खुद को छोटा मत समझिए
प्रार्थना और प्रयास दोनों जारी रखिए
एक दिन आप पीछे मुड़कर देखेंगे और कहेंगे —
“धन्यवाद प्रभु, आपने मुझे रोका क्योंकि आप मुझे बेहतर देना चाहते थे।”


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