आज के समय में लोग मतलबी क्यों हो गए हैं? | Adhyatmik Shakti
आज के समय में लोग मतलबी क्यों हो गए हैं? क्या पैसा, डर और अकेलापन इसकी वजह हैं? इस गहरे आध्यात्मिक लेख में जानिए समाज के बदलते स्वभाव की सच्चाई। Adhyatmik Shakti.
2/1/20261 min read
क्या वाकई लोग बदल गए हैं या हम सच देखने लगे हैं?
अक्सर लोग कहते हैं —
“आजकल कोई किसी का नहीं रहा”
“हर कोई सिर्फ़ अपने मतलब का है”
“काम निकल गया तो रिश्ता खत्म”
यह शिकायत नई नहीं है,
लेकिन इसकी तीव्रता आज के समय में सबसे ज़्यादा महसूस हो रही है।
सवाल यह नहीं है कि लोग मतलबी हो गए हैं या नहीं,
सवाल यह है कि क्यों हो गए हैं?
Adhyatmik Shakti का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं,
बल्कि इस बदलाव की जड़ को समझना है।
1. भय (Fear): आज के इंसान का सबसे बड़ा गुरु
आज का इंसान ज़्यादा लालची नहीं है,
वह ज़्यादा डरा हुआ है।
डर किस बात का?
कल का डर
पैसे का डर
अकेले हो जाने का डर
असफल होने का डर
समाज में पीछे रह जाने का डर
जब इंसान डर में जीता है,
तो वह संवेदना नहीं, सुरक्षा चुनता है।
और सुरक्षा अक्सर स्वार्थ बन जाती है।
2. प्रतियोगिता ने करुणा को मार दिया
पहले जीवन में सहयोग था।
आज जीवन में मुकाबला है।
दोस्त से मुकाबला
रिश्तेदार से मुकाबला
सहकर्मी से मुकाबला
यहाँ तक कि भाई-बहन से मुकाबला
जब हर इंसान दूसरे को “प्रतिद्वंदी” समझने लगे,
तो वह भावनाओं को बोझ मानने लगता है।
मतलबीपन वहाँ पैदा होता है
जहाँ हर रिश्ता लाभ-हानि के तराज़ू पर तौला जाता है।
3. पैसा समस्या नहीं है, पैसा सोच बन गया है
समस्या पैसे से नहीं है।
समस्या है कि पैसा अब मूल्य बन गया है।
आज:
इंसान की कीमत उसकी कमाई से तय होती है
रिश्तों की गहराई सुविधा से मापी जाती है
इज़्ज़त उपयोगिता से जुड़ गई है
जब मूल्य बदल जाते हैं,
तो मनुष्य का व्यवहार भी बदलता है।
आध्यात्म कहता है:
जहाँ धन लक्ष्य बन जाए, वहाँ धर्म कमजोर पड़ जाता है।
4. डिजिटल युग ने रिश्तों को “यूज़ एंड थ्रो” बना दिया
सोशल मीडिया ने हमें जोड़ने का वादा किया था,
लेकिन असल में हमें अंदर से अकेला बना दिया।
आज:
रिश्ते ब्लॉक हो जाते हैं
दोस्त अनफॉलो हो जाते हैं
भावनाएँ Seen पर छोड़ दी जाती हैं
जब संबंधों को हटाना इतना आसान हो जाए,
तो निभाने की इच्छा भी खत्म हो जाती है।
5. लोग मतलबी नहीं, भावनात्मक रूप से थके हुए हैं
यह बात बहुत कम लोग स्वीकार करते हैं।
आज का इंसान:
बार-बार टूटा है
बार-बार धोखा खा चुका है
बार-बार उम्मीद करके हारा है
इसलिए उसने एक दीवार खड़ी कर ली है।
वह कहता है:
“मैं अब किसी के लिए नहीं जीऊँगा”
यह स्वार्थ नहीं,
यह आत्म-रक्षा (Emotional Defense) है।
6. अध्यात्म से दूरी = संवेदना से दूरी
जब इंसान:
ध्यान छोड़ देता है
आत्मचिंतन छोड़ देता है
मौन छोड़ देता है
अपने भीतर झाँकना बंद कर देता है
तो वह बाहर ही जीने लगता है।
बाहर:
दिखावा है
तुलना है
अहंकार है
असंतोष है
Adhyatmik Shakti मानता है कि
अध्यात्म के बिना समाज तकनीकी रूप से उन्नत, लेकिन आत्मिक रूप से गरीब हो जाता है।
7. “मैं” की पूजा और “हम” की हत्या
आज का युग “मैं” का युग है।
मेरी सफलता
मेरी खुशी
मेरी आज़ादी
मेरा फायदा
जब “मैं” बहुत बड़ा हो जाता है,
तो “हम” दम तोड़ देता है।
यही मतलबीपन की जड़ है।
8. लोग मदद क्यों नहीं करते आज?
क्योंकि:
उन्हें डर है कि कोई उनका फायदा उठा लेगा
उन्हें भरोसा नहीं रहा
उन्हें पहले ठगा जा चुका है
सहायता तभी होती है
जब मन सुरक्षित महसूस करे।
डरा हुआ मन करुणा नहीं कर सकता।
9. क्या यह पीढ़ी बुरी है? नहीं।
यह पीढ़ी:
दबाव में है
उलझन में है
दिशा-विहीन है
मतलबीपन बुराई नहीं,
यह लक्षण है।
बीमारी है:
अर्थहीन जीवन
भीतर का खालीपन
आत्मा से कटाव
10. समाधान क्या है? (यही सबसे ज़रूरी प्रश्न है)
समाधान भाषण नहीं है।
समाधान वापसी है।
वापसी:
स्वयं की ओर
मौन की ओर
सरलता की ओर
करुणा की ओर
Adhyatmik Shakti यही सिखाता है:
जब व्यक्ति भीतर स्थिर होता है, तभी वह बाहर निस्वार्थ हो पाता है।
11. आप क्या कर सकते हैं? (व्यावहारिक उत्तर)
हर मतलबी इंसान से नफ़रत न करें
यह समझें कि वह भी किसी युद्ध से गुजर रहा है
सीमाएँ रखें, लेकिन दिल कठोर न बनाएं
अच्छे बनें, मूर्ख नहीं
दयालु बनें, कमजोर नहीं
यही संतुलन है।
निष्कर्ष: यह समय इंसानों को दोष देने का नहीं, समझने का है
आज का इंसान मतलबी नहीं है,
वह भटका हुआ है।
और भटके हुए को सज़ा नहीं,
दिशा चाहिए।
यदि आप अभी भी संवेदनशील हैं,
तो आप कमज़ोर नहीं हैं —
आप ज़रूरी हैं।
Adhyatmik Shakti इसी आशा पर खड़ा है।


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